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CAPF को सेना का दर्जा देने की मांग को ग्रह मंत्रालय ने किया खारिज, बताया यह कारण…

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Home ministry denied the request to give CAPF army like status

लद्दाख मे केंद्रीय अर्धसैनिको बलो को हॉट स्प्रिंग इलाके मे चीन की सेना पीएलए और सरदार पोस्ट पर पाकिस्तानी सेना की एक बिग्रेड को धुल चटाने का मौका नही मिल सकता। इन बलो ने अपनी बहादुरी को पंजाब का आतंकवाद, मौजूद जम्मू कश्मीर में आतंकियों का जमावड़ा, उत्तर-पूर्व में उग्रवाद और आधा दर्जन से अधिक राज्यों में नक्सल प्रभावित क्षेत्र बहादुरी दिखाई है।

देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ की तरफ से जब केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास यह प्रस्ताव भेजा गया कि यहां पर भी आर्मी की तर्ज पर 15 दिन की बजाय 28 दिन की कैजुअल लीव कर दी जाये तो उन्होंने कहा की 7वे केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश के बिना कुछ नही हो सकता। सीएपीएफ अनिवार्य तौर से एक सिविलियन फोर्स है। जिसकी नियम व कानून डिफेन्स फोर्स से अलग है।

आपको बता दें कि सीएपीएफ’ जिसमें सीआरपीएफ, असम राइफल, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे बल शामिल हैं, वहां 15 दिन की कैजुअल लीव लेने के लिए नियम है। जहां सेना मे 28 दिन की कैजुअल लीव मिलती है। और वही सीएपीएफ मे बटालियन या ग्रुप सेंटर को 15 दिन की कैजुअल लीव मिलती है। वजह ये है कि ऐसी पोस्टिंग वाली जगह पर सिर्फ 6 दिन की लीव होती है। वही दूसरी तरफ, स्थायी लोकेशन जैसे मुख्यालय आदि पर तैनात स्टाफ को आठ दिन की केजुअल लीव मिलती है। इसकी वजह वहाँ पांच दिन की लीव मिलती है।

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