इंसानी ताक़त के साथ तकनीकों का इस्तेमाल फायदे की बात होती है।देश की सुरक्षा के लिए भी सेना के जवानों के साथ तकनीकों का लाभ उठाना एक सही निर्णय है।इसे है चार से पांच तकनीकों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया है।यह क्वांटम कंप्यूटिंग,बिग डाटा एनलाटिक्स,आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस,ब्लाक चेन और रोबोटिक्स है।
कुछ समय पहले इस बात पर चर्चा हुई थी कि सेना में नई तकनीकों का इस्तेमाल किस प्रकार लिया जाए।अब आर्मी डिजाइन ब्यूरो के तहत दो प्रोजेक्ट आर्मी टेक्नोलॉजी फंड और आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड के जरिये मंजूरी दी गई है।इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक व्याप्त रुपरेखा तैयार की है जिसमे लगभग प्रौद्यौगिकियों पर आगे कार्य करना है।यह प्रोजेक्ट्स करीब 23 और 36 करोड़ रुपये में इस्तेमाल किए जाएंगे।क्वांटम तकनीक एक एंसी तकनीक है जिसे हैक नहीं किया जा सकता है इसलिए इसका इस्तेमाल सूचनाओं को आदान-प्रदान करने के काम आयेगी।
बिग डाटा एनालेटिक्स तीव्र विश्लेषण और सुरक्षा संबंधी आंकड़ों के व्यापक में किया जाएगा।इसके साथ साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीकों के माध्यम से सेना सीमाओं की निगरानी रखने में कर सकते है।ब्लाक चेक तकनीक से वित्तीय कार्यों को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।और रोबोटिक्स तकनीक का इस्तेमाल उन जगाहों में किया जा सकता है जहां जवानों की तैनाती महंगी और कठिन होती है।
जनरल मनोज मुकंद नरवणे का कहना है कि सेना में अब बदलाव किए जा सकते है।यह बदलाव के दौर से गुजर रही है।भविष्य में भारतीय सेना को मानव रक्त के साथ तकनीकी ताक़त मिलने की दिशा में वे कार्य के रहे है।और यह बदलाव थल सेना के साथ ही नहीं बल्कि तीनों सेनाओं में किए जाएंगे।







