देहरादून के पटेलनगर में डीजीपी अशोक कुमार ने काम के प्रति लापरवाही बरतने पर एक कांस्टेबल को निलंबित किया। दरअसल एक प्रोफेसर ने सोशल मीडिया के जरिये डीजीपी को सूचना दी कि उनका एक पुलिसकर्मी दुर्व्यवहार करता हुआ पाया गया। प्रोफेसर ने डीजीपी से आग्रह किया कि कांस्टेबल के खिलाफ कोई एक्शन लिया जाये। इसपर मामले की जांच करने पर डीजीपी ने कांस्टेबल को आरोपी ठहराया और कांस्टेबल ने भी अपनी गलती स्वीकार की। बाद में डीजीपी ने कांस्टेबल को निलंबित कर दिया।
चलिये अब जानते हैं कि आखिर कांस्टेबल को डीजीपी ने निलंबित क्यों किया। दरअसल प्रोफेसर के घर के पास एक व्यक्ति संदिग्घ अवस्था में पड़ा हुआ था। जिसके बाद प्रोफेसर ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। कंट्रोल रूम ने प्रोफेसर का नंबर पटेलनगर थाना में दिया। और कंट्रोल रूम ने प्रोफेसर को बताया कि थाने से आपको कॉल किया जाएगा। पटेलनगर थाने से एक कांस्टेबल ने प्रोफेसर को कॉल किया।
कांस्टेबल ने प्रोफेसर से मामले के बारे में पूछा। जब उन्होंने कांस्टेबल को एक व्यक्ति के संदिग्ध पड़े होने की खबर दी। प्रोफेसर ने कांस्टेबल से आग्रह खाया कि वह एक बार आकर संदिग्घ पड़े हुए व्यक्ति को चेक कर ले। इस बात लर कांस्टेबल प्रोफेसर के साथ दुर्व्यवहार करने लगा। कांस्टेबल ने कोविद आदि का भी बहाना बनाया ताकि उसे वहाँ जाना न पड़े। बाद में प्रोफेसर ने सोशल मीडिया के जरिये कॉन्स्टेबल की शिकायत डीजीपी से की।
डीजीपी अशोक कुमार ने जब मामले की जांच करवायी तक कांस्टेबल पर लगे आरोप सच साबित हुए। डीजीपी ने कांस्टेबल को निलंबित कर दिया और कहा कि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बर्दाश्त की जायेगी।







