
एक किसान अपने खेत से बोरिंग करके पानी निकाल रहा होता हैं जिसमे उसकी और उसके बेल दोनों की मेहनत होती हैं जैसे ही बोरिंग करते समय खेत से पानी निकलने लगता है तो किसान जिस बेल से बोरिंग करा रहा था उसको प्रणाम कर उसके पैर छूता हैं बदले में बेल भी आशीर्वाद के तोर पर अपने पैर अपने मालिक के पीठ पर रखता है और सहलाता है।
किसान ने भी समझा की ये उसकी अकेले की मेहनत नहीं हैं इसमें उस बेल का भी पूरा सहयोग और मेहनत थी जो बिना बोले हर दिन उसके साथ चला दोनों ने दिन रात काम किया तब जाकर ये सफलता हाथ लगी।





