
Iआज का मामला सितंबर 2009 से जुड़ा है।क्राइम ब्रांच-46 की टीम द्वारा राजीव नगर इलाके में रहने वाले हंसराज राठी के साइबर कैफे में तीन सितंबर को छापा मारा।उन पर आरोप लगाया कि वे लोग कैफे में फर्जी वोटर कार्ड और आई कार्ड बनाते है। छापे मारने वाली टीम में विनोद,एसआइ रामदयाल, कांस्टेबल सुनील और राजेश शामिल थे।
छापे मार उन्होंने कैफे के मालिक हंसराज राठी और उनके दोनों कर्मचारियों राजेंद्र और नरेंद्र को उठाकर उनसे पैसों की मांग की।उन्होंने तीनों से एक लाख रुपए की मांग की लेकिन तीनों पैसें देने के लिए नहीं माने तो पांच सितंबर को उन्होंने छापे की कार्रवाई दिखाई ,सिविल लाइन थाने में तीनों लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उन्हें जेल भेज दिया।
इसके बाद तीनों लोगों को नवंबर में जमानत मिली।उनके कैफे में सील लगी हुई थी।इसके बाद हंसराज ने अदालत का सहारा लिया और अपना कैफे खुलवाया। वहीं कैफे के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे थे।जब उन्होंने वह फुटेज देखी तो उसमे तीन सितंबर को हुआ घटनाक्रम कैद था। इस बात की शिकायत सीआइडी चीफ से की गई उन्होंने बताया कि छापा तीन सितंबर को मारा गया था न कि पांच सितंबर को।
जब इस बारे में जांच पड़ताल हुई तो शिकायत सही थी।इस पूरे मामले में पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। उनके खिलाफ पैसे मांगने, झूठे मामलों में फंसाने,मारपीट करने के मामले में दोषी करार के तहत मामला दर्ज किया गया और चारो पुलिसकर्मियों कांस्टेबल सुनील,राजेश,विनोद और एसआई रामदयाल को निलंबित कर दिया गया था।इनमे से रामदयाल नामक पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो चुका है,जिसे 5 साल की सजा सुनाई गई है इनके अलावा अन्य 3 पुलिसकर्मी को 3 साल की सजा सुनाई गई।साथ ही सभी पर 40-40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
इस मामले में शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अमित जैन,एनके जैन और विपुल जैन ने कहा ,”जिला अदालत ने चारों को अवैध वसूली, अवैध रूप से हिरासत में रखने, झूठा मामला दर्ज कराने और मारपीट करने का दोषी ठहरा दिया है। यह मामला उन पुलिस कर्मियों के लिए सबक के रूप में होगा जो अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करते हैं। वसूली के लिए झूठे मामलों में लोगों को फंसाने का प्रयास करते हैं। “





