उत्तराखंड- तीलू रौतेली उत्तराखंड गढ़वाल की एक ऐसी वीरांगना थी जिन्होंने सिर्फ 15 साल की उम्र रणभूमि में उतर गई थी। 7 साल तक उन्होंने दुश्मन राज्य को कड़ी चुनौती दी। 15 से 20 वर्ष की आयु में अकेले साथ युद्ध लड़ने वाली तीलू विश्व में एकमात्र वीरांगना है। हर साल उनकी जयंती पर अच्छा कार्य करने वाली महिलाओ को तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
आपको बता दें कि उत्तराखंड तीलू रौतेली के वर्ष गांठ के दिन हर साल 8 अगस्त को कुछ वीरांगनाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस साल भी राज्य भर में तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए 95 आवेदन प्राप्त किए गए थे, जिसमें से 22 नामों का चयन कर लिया गया है। बृहस्पतिवार को हुई बैठक में वीरांगनाओं के अंतिम नामों पर मुहर लगाई गई। सभी वीरांगनाओं को 8 अगस्त को तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
इसके अलावा अलग-अलग जिलों में चयनित 22 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा। इस बार कोरोना योद्धा के रूप में कार्य करने वाली वीरांगनाओं को भी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। 8 अगस्त को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री व कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के हाथों सभी वीरांगनाओं को पुरस्कार दिया जाएगा।
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