
अंकिता हत्याकांड मामले में एसआईटी की जांच चल रही है वही प्रदर्शनकारियों द्वारा सीबीआई जांच की मांग की जा रही है इसी बीच उत्तराखंड महिला मंच समेत अन्य संगठन अंकिता मामले में हो रहे जांच-पड़ताल पर सवाल उठा रहे हैं उनका आरोप है।
अंकिता हत्याकांड में सबूत छुपाया जा रहे हैं और प्रशासनिक लापरवाही भी की जा रही है इसी कारण उत्तराखंड महिला मंच ने देश भर के जिम्मेदार महिला संगठनों के साथ मिलकर फैक्ट फाइंडिंग टीम गठित की है।
बता दें कि फैक्ट फाइंडिंग में कुल 20 सदस्य हैं जो श्री नगर ऋषिकेश और देहरादून का दौरा करेंगे इसी बीच फैक्ट फाइंडिंग टीम आज श्रीनगर के श्रीकोट में अंकिता के घर जाएगी और अंकिता के परिजनों से बातचीत करेगी इसके साथ ही टीम श्रीनगर में लोगों से भी बातचीत करेगी।
वहीं दूसरी टीम वनतरा रिजॉर्ट और चीला बैराज के आसपास जगह का दौरा करेंगे साथ ही वहां आसपास के लोगों से पूछताछ करेगी इसके बाद एक अन्य टीम होटल जाकर वहां काम कर रहे लोगों से बात करेगी वही 28 अक्टूबर के दिन राज्य महिला आयोग बीजेपी उत्तराखंड एसआईटी प्रमुख पर्यटन सचिव सचिव से मुलाकात करेगी और इसके बाद में प्रदर्शनकारियों से भी बात करेगी
बता दें कि इस फैक्ट फाइंडिंग टीम में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के वकील प्रोफेसर जनवादी महिला समिति फाउंडेशन शामिल है आम आदमी पार्टी ने भी अंकिता कांड के मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।
उन्होंने हरिद्वार के प्रेम नगर घाट में अंकिता के नाम का दीप दान करके श्रद्धांजलि अर्पित की है साथ ही वह चाहते हैं कि अंकिता के हत्याकांड में सीबीआई जांच हो बता दें कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को 2 माह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन अभी भी मामले में इंसाफ नहीं मिल पाया है।
इसी बीच आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष महिला मोर्चा हेमा भंडारी ने बताया कि जांच में वीवीआईपी लोगों का नाम बार-बार आ रहा है वह चाहते हैं कि सीबीआई जांच में इन सभी लोगों के नाम बाहर आएं ताकि अंकिता को न्याय मिल सके।
वही आप आदमी पार्टी के विधानसभा सीट अध्यक्ष अनिल सती ने बताया कि अंकिता पूरे उत्तराखंड की बेटी थी भैया दूज के इस अवसर पर आम आदमी पार्टी द्वारा उन्हें दीपदान करके श्रद्धांजलि अर्पित की गई और साथ ही सीबीआई जांच की मांग की गई अनिल सती ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी केदारनाथ धाम के दौरे पर आते हैं लेकिन प्रदेश की बेटी अंकिता भंडारी के मामले में कुछ भी नहीं बोलते यह दुर्भाग्यपूर्ण है।





