चमोली आपदा को एक हफ्ते से ज्यादा हो गया है जिससे हर कोई भुला नहीं पा रहा है। आईटीबीपी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान लागत रेस्क्यु ऑपरेशन चला रहे हैं। इस भीषण आपदा में कई लोगों की जान गई और कई ऐसे है जो मौत के मुंह से बचकर बाहर आए हैं उसमें से एक हैं विपुल कैरेनी। विपुल कैरेनी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे और साथ ही उनके 24 दोस्त भी उससे पॉवर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। आपदा के आते ही उनकी मां का अचानक फोन आया और उसी के जरिए विपुल की और उसके 24 दोस्तों को जान बच पाई। 7 फरवरी की सुबह विपुल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे और तभी अचानक उनकी मां का फोन आया और उनकी मां घबराई हुई थी और उन सभी को बैराज के पास से हट जाने को कहा, विपुल ने बताया कि पहले उसने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब बार – बार उसकी मां के फोन आते रहे तो वो और उनके साथी बैराज क्षेत्र से हट गए, तो इस तरह से एक फोन कॉल ने विपुल और उनके 24 दोस्तों की जान बच पाई।विपुल की मां को अनहोनी का अंदेशा हो गया था।
विपुल का गांव ऊंचाई वाले इलाके में है और विपुल का कहना हैं कि जिस समय बाढ़ आई उस समय मेरी मां बाहर काम कर रही थी और फिर मेरी मां और पत्नी अनीता ने पानी को स्तर से 15 मीटर ऊपर उठते देखा और अपने सामने आने वाली हर चीज को डुबोते हुए देखा। जिसके बाद मां ने मुझे फोन किया। फिर उसके बाद मैंने और मेरे साथियों ने दौड़कर टूटी हुई सीढ़ियों में अपनी जान बचाई। बताया गया है कि विपुल की शादी को सिर्फ दो महीने ही हुए हैं, और वो 7 साल की उम्र से बैराज में काम कर रहे हैं।
विपुल ने बताया कि वो रविवार को ज्यादा कमाई के लिए काम पर आए थे साथ ही वो ढाक गांव के रहने वाले हैं। विपुल के दोस्त संदीप ने बताया कि आज उनकी जान विपुल की मां की वजह से बची है। विपुल और उनके साथी भाग्यशाली थे, जो उनकी जान इस भीषण आपदा में बच गई। विपुल का कहना है कि अभी भी आपदा के बाद उनके 100 दोस्त लापता हैं। और शायद वो पानी में बह गए। आईटीबीपी और एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के जवानों द्वारा लगातार रेस्क्यु ऑपरेशन चलाया जा रहा है और आशा है कि विपुल के सभी साथी मिल जाएं।






