उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारतीय सेना में भर्ती होने को लेकर बहुत ही ज्यादा जुनून देखने को मिलता है. इन पहाड़ी राज्यों के युवा सालों साल मेहनत करके अपनी कड़ी मेहनत के दम पर भारतीय सेना में भर्ती होते हैं. बचपन से ही भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना उत्तराखंड राज्य के नैनीताल की रहने वाले दो जुड़वा भाई चतुर और चंचल मेहरा ने भी देखा था.
अपने सपने को पूरा करने के लिए दोनों भाइयों ने बहुत ही ज्यादा कड़ी मेहनत की और अपने सपने को पूरा कर दिखाया. चतुर और चंचल महरा ओखलकांडा ब्लॉक के अधौड़ा गांव में रहते हैं. अपनी मेहनत और कड़े परिश्रम के दम पर इन दोनों भाइयों ने ही अपनी पहली भर्ती में ही सफलता हासिल कर ली है.
इस बारे में चतुर महरा और चंचल महरा के बड़े भाई नंदन महरा ने बताया कि जून 2023 में रानीखेत में अग्निवीर भर्ती रैली हुई थी. जिसमें दोनों भाइयों ने हिस्सा लिया था. इस भर्ती में उनके एक भाई हेम महरा मेडिकल परीक्षा को पास नहीं कर पाए. मगर चतुर और चंचल दोनों ने हीं मेडिकल क्वालीफाई कर लिया था. दोनों ने ही अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से प्राप्त की है.
उन दोनों के पास ही उचित संसाधन नहीं थे मगर फिर भी अपनी हिम्मत न हारते हुए वहां कड़ी मेहनत करते रहे.चतुर और चंचल के पिता गांव में खेती करके अपना घर चलते हैं.उनके दोनों बेटे अब फौजी बनकर देश की सेवा करेंगे. चतुर और चंचल ने बताया कि अगर आप भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते हैं तो कड़ा परिश्रम ही एकमात्र जरिया है. उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिजन, गुरुजनों और ग्रामीणों को दिया है.






