
ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में 100 से अधिक आवेदकों को पास कराने की जिम्मेदारी एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आरोपी ने कबूली है ।एसटीएफ से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इसके लिए हर उम्मीदवार को छह से सात लाख रुपये देने पड़े
बता दें कि ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा के दौरान हुए घोटाले में कुल सात लोग शामिल थे प्रिंटिंग प्रेस के सीईओ राजेश पाल और तीन अन्य लोगों शामिल थे जबकि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष , सचिव और परीक्षा नियंत्रक ने गिरोह के नेता के रूप में कार्य पर थे ।इनमें से दो संदिग्धों को एसटीएफ की पूछताछ में गवाह बनाया गया है।
इस तरह से आरबीएस रावत, मनोहर सिंह कन्याल और यूकेएसएसएससी के तत्कालीन अध्यक्ष राजेंद्र सिंह पोखरिया ने करोड़ों पैसे बनाए ।परीक्षा में घोटाले की पहचान को लेकर विवाद शुरू होते ही आरबीएस रावत ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
जब परीक्षा को लेकर विवाद सार्वजनिक हो गया , तो विवाद शुरू हो गया और आरबीएस रावत ने जल्द ही एक सदस्य और आयोग के सचिव को दोष देना शुरू कर दिया।उन्होंने 9 जुलाई 2016 को एक पत्र में सरकार को सूचित किया कि आयोग के एक सदस्य के भतीजे और बहू परीक्षा दे रहे थे ।
तत्कालीन सचिव मनोहर सिंह कन्याल के घर पर ओएमआर शीट स्कैन की गई थी , जिसे किराए पर दिया गया था ।इस संपत्ति की मालकिन कन्याल की पत्नी हैं । उसी घर में ओएमआर शीट स्कैन करने का झांसा देकर ठगी की गई।
जिन अभ्यर्थियों के साथ आरोपियों ने साजिश रची थी , उन्हें निर्देश दिया गया था कि ओएमआर शीट के सर्किल पूरे न करें .ओएमआर शीट स्कैनिंग के लिए पहुंचाने से पहले आरोपी ने खुद ही गोले भर लिए।
एसटीएफ द्वारा 30 से अधिक उम्मीदवारों को चिह्नित करने और जांच के दौरान उनकी ओएमआर शीट की तुलना करने के बाद त्रुटि का पता चला ।इस मामले में गवाह बनाए गए दोनों आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एसटीएफ को सच्चाई बताई , जिससे एसटीएफ उन्हें आसानी से पकड़ सकी ।






