नारी ईश्वर की बनाई सबसे अद्भुत रचना है| हमारी भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में महिलाओं को विशेष दर्जा प्राप्त है| भारतीय महिलाएं बहुत ही मेहनती होती है| उनके लिए उनका परिवार ही उनकी पहली प्राथमिकता होता है| आज की कहानी भी ऐसी महिला पर है जिन्होंने पति की गुजर जाने के बाद अपने परिवार का भरण पोषण किया।
हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार जिले की पहली महिला ई रिक्शा चालक किरण की| पति की मृत्यु के बाद किरण पूरी तरह से टूट चुकी थी| उनके सामने कई सवाल थे| जैसे कि बच्चों की पढ़ाई उनके भरण-पोषण चिंता, ये सब वह किस तरह से करेगी| इस दुख के समय में सभी रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया था।
परंतु इन चुनौतियों के बावजूद भी किरण ने हार नहीं मानी और वापस अपनी जिंदगी सवारने की ठानी। किरण ने किसी के सामने हाथ फैलाने या किसी पर निर्भर होने की बजाय आत्मनिर्भर बनने की राह को चुना| जब सब लोग ताने मार रहे थे। जब सारे रिश्तेदार उसके खिलाफ हो चुके थे। तब किरण ने सारे कटु शब्दों को नकारते हुए। ई रिक्शा चलाने का काम करने का निर्णय लिया और वह बन गई हरिद्वार, देवपुर की पहली ई रिक्शा चालक| जिसने कई लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बनने का काम किया।
किरण हरिद्वार की पहली ऐसी महिला है| जिन्होंने ई रिक्शा चलाने की हिम्मत दिखाई| हर कोई किरण के इस जज्बे को सैल्यूट करता है| किरण सुबह से लेकर दोपहर तक ई रिक्शा चलाती हैं और फिर दोपहर में घर आकर खाना बनाती है और शाम को एक बार फिर से रात्रि 11 बजे तक गंगा आरती के बाद सवारियों को उनके गंतव्य स्थान तक छोड़ती हैं। हर वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से बराबरी कर रही है। कहानी के तत्व होते हैं।
किरण की ये कहानी प्रोत्साहित करती है उन महिलाओं को जो अपने आप को लाचार समझती हैं, खुद को कमजोर वर्ग का समझकर कभी आगे नहीं बढ़ पाती है| किरण बहुत सी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और हर कोई किरण के इस जज्बे को दिल से सपोर्ट करता है|