
उउत्तराखंड नेपाल और दिल्ली एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में लगातार पिछले कुछ समय से भूकंप का खतरा बना हुआ है इसी महीने 6 नवंबर से 12 नवंबर तक नेपाल और उत्तराखंड के बॉर्डर पर आए भूकंप का असर पूरे राज्य समेत दिल्ली तक देखने को मिला।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की ) ने संयुक्त रूप से एक भूकंप अलर्ट ऐप विकसित किया ।जिससे कि भूकंप से आने के पहले के संकेत के बारे में एलर्ट का पता चलता है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि इस ऐप को अपग्रेड किया जाएगा जिससे कि भूकंप के आने से पहले की सटीक जानकारी लोगों को लोगों तक पहुंच पाए जिससे की जान माल का नुकसान होने से बचा जा सकता है।
इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है जानकारी के मुताबिक 350 नहीं हिस्सों में सेंसर लगाए जाएंगे अभी तक केवल 163 जगह में सेंसर लगी हुई है आपदा प्रबंधन विभाग ने 58 करोड़ की लागत का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है राज्य में कई समय से छोटे बड़े भूकंप देखने को मिल रहे हैं जो लगभग 3.4 से 6.3 की तीव्रता के है।
जानकारों की माने तो छोटे-छोटे भूकंप बड़े भूकंप का संकेत है और उत्तराखंड में इसका काफी असर देखने को मिल सकता है क्योंकि उत्तराखंड में काफी समय से कोई बड़ा भूकंप अभी तक नहीं आया है।
आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि दून से पिथौरागढ़ तक लगभग 163 सेंसर लगे हैं और अगर केंद्र सरकार हमारा यह प्रस्ताव नहीं भी मानती है। 500 से अधिक नहीं सेंसर उनके द्वारा लगाए जाएंगे जो लगभग 5 से 10 किलोमीटर की अंतरालमें होंगे।
बताते चले कि जिनके मोबाइल में यह एप्प अपडेट था उनके मोबाइल में भूकंप आने से पहले अलर्ट का नोटिफिकेशन आया था।