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उत्तराखंड: हवलदार गजेंद्र सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र, साथियों को बचाने में दिया था सर्वोच्च बलिदान

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Uttarakhand's Havildar Gajendra Singh awarded Kirti Chakra posthumously; made the supreme sacrifice while saving his comrades.
Uttarakhand's Havildar Gajendra Singh awarded Kirti Chakra posthumously; made the supreme sacrifice while saving his comrades.

उत्तराखंड की वीरभूमि कपकोट के अमर सपूत हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मान कीर्ति चक्र से अलंकृत किया जाएगा।भारतीय सेना की दो पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में तैनात हवलदार गजेंद्र सिंह ने 18 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम जंगलों में आतंकियों के खिलाफ अभियान के दौरान अदम्य साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान का परिचय दिया था। उनकी वीरता से कपकोट ही नहीं, पूरे उत्तराखंड का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है।

सेना के अनुसार, हवलदार गजेंद्र सिंह इंटेलिजेंस ट्रूप हवलदार के रूप में आतंकियों के संभावित ठिकाने की लगातार निगरानी कर रहे थे। 18 जनवरी को उन्होंने घने जंगल में एक खड़ी चट्टान के समीप संदिग्ध ठिकाना देखा। खतरे को भांपते हुए वे बेहद करीब पहुंचे और आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि की। उनके चुनौती देने पर आतंकियों ने अचानक भारी गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें उनके साथ मौजूद दोनों स्काउट घायल हो गए।

गोलीबारी के बीच हवलदार गजेंद्र सिंह ने अदम्य साहस दिखाते हुए पहले घायल स्काउट को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और उसे जीवनरक्षक प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद, अपनी जान की परवाह किए बिना, उन्होंने दूसरे घायल साथी को भी निकालने का प्रयास किया। इस दौरान उन्हें कई गोलियां लगीं, लेकिन उन्होंने अपने अभियान को जारी रखा।

दोनों साथियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद भी उनका साहस कम नहीं हुआ। अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद उन्होंने दोबारा मोर्चा संभाला और आतंकियों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए एक वांछित विदेशी आतंकी को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद हवलदार गजेंद्र सिंह ने घटनास्थल पर ही वीरगति प्राप्त की।

हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया ने अपने अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और साथियों के प्रति निस्वार्थ समर्पण से भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं को साकार किया। उनकी वीरता और बलिदान ने कपकोट क्षेत्र में गर्व और भावुकता का माहौल बना दिया है। पिता धन सिंह गढ़िया और माता चंद्रा गढ़िया के वीर पुत्र हवलदार गजेंद्र सिंह ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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