गुरुग्राम के भोंडसी थाना के अंतर्गत घामरोज गांव से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां, एक 16 वर्षीय छात्रा ने प्रधानाचार्य की ताने और मारपीट से तंग होकर आत्महत्या कर दी। बता दें की, पुलिस ने इस मामले में प्रधानाचार्य मनोज राघव और उनके भाई के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। खबर है की, इसकी शिकायत 9 अप्रैल को दी गई थी, लेकिन इस केस को 14 अप्रैल को दर्ज किया गया। जानकारी के मुताबिक, शिव कॉलोनी निवासी समय सिंह ने बताया कि उनकी भतीजी मोनिका विवेक भारती वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा दस की छात्रा थी और आठ अप्रैल को प्रधानाचार्य और उनके भाई मनवीर ने उससे मारपीट की और बच्ची को गालियां भी दीं। उसके बाद प्रधानाचार्य ने मोनिका के पिता सतीश कुमार को फोन करके कॉलेज में आने को कहा।
अगले दिन नौ अप्रैल को सुबह 11 बजे भाई सतीश कुमार, पत्नी कीर्ति दोनों बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे तो वहां पर प्रधानाचार्य मनोज राघव ने मोनिका और उसके छोटे भाई वंश के सामने कहा कि उससे मोबाइल बरामद हुआ है और उसके नाखून बढ़े हैं। अंगूठी पहनती है, आगे चलकर आपको शर्मिंदा करा देगी, और इसी परिस्थितियों में हम उसे स्कूल में नहीं पढ़ा पाएंगे। और उसके बाद उसी दिन विद्यालय से घर आने के बाद मोनिका मायूस हो गई, और उसने दोपहर को खाना भी नहीं खाया था।
उसके कुछ देर बाद वो ऊपर के कमरे में चली गई फिर काफी देर तक जा वह नीचे नहीं आई, तो उसको बुलाने के लिए उसका भाई गया। और वह कमरे में नहीं मिली, फिर जब बाथरूम में चेक किया तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी प्रयास करने पर भी जब बाथरूम नहीं खुला तो यह जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को दी गई। परिवार के लोगों ने बाथरूम का दरवाजा तोड़ा तो देखा कि मोनिका ने चुन्नी से फंदा लगा लिया था।
उसके बाद जब उसे अस्पताल ले गए तो वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं पुलिस ने मोनिका के शव पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। उसके बाद परिजनों ने थाने में प्रधानाचार्य मनोज राघव के खिलाफ शिकायत की। शिकायत सीएम विंडो और गृहमंत्री अनिल विज को भी भेजी। बताया जा रहा है की,13 अप्रैल तक पुलिस ने प्रधानाचार्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की.
और उसके बाद फिर 14 अप्रैल को परिवार और आसपास के लोग थाने पहुंचे उसके बाद पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी। वहीं दूसरी ओर कालेज के प्रधानाचार्य ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। अब देखना होगा की, पुलिस आगे की करती है। कई बार बच्चे अपने गुस्से में भी ऐसा कदम उठा लेते हैं, जिसके बाद उनके परिवार को भुगतना पड़ता है। प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी से कड़ी कारवाई होनी चाहिए।







